EDUCATION, CONFERENCE, SURVEY : शिक्षा से आर्थिक विकास को लगेंगे पंख, क्रिड में वार्षिक सम्मेलन में पूर्व पीएम ने रखे विचार, मौजूदा शिक्षा प्रणाली में कई बदलाव व सुधार करने होंगे, खासकर शिक्षा में सुधार तभी होगा जब सरकारी स्कूलों का बुनियादी ढांचा मजूबत होगा - मनमोहन सिंह
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने शिक्षा के गिरते स्तर पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि देश में सामाजिक और आर्थिक बदलाव के लिए शिक्षा की भूमिका अहम है। शिक्षा बिना न तो आर्थिक सुधार कारगर है और न ही आर्थिक विकास में तेजी संभव है। भारत को विश्व शक्ति बनाना है तो मौजूदा शिक्षा प्रणाली में कई तरह के बदलाव व सुधार करने होंगे। वह शुक्रवार को एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशन के 17वें वार्षिक सम्मेलन-एजूकेशन एंड डेवलपमेंट के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।
सेंटर फॉर रिसर्च इन रूरल इंडस्टियल डेवलपमेंट (क्रिड) में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री ने सरकारी शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई पर आधारित सर्वे की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए कहा कि यह देश के लिए चिंता का विषय है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर इतनी तेजी से गिर रहा है कि सातवीं-आठवीं में पढ़ने वाले छात्र तीसरी व चौथी कक्षा के गणित के सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
शिक्षा में सुधार तभी होगा जब सरकारी स्कूलों का बुनियादी ढांचा मजूबत होगा, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां सरकारी स्कूलों को छोड़कर न तो निजी स्कूल हैं और न ज्ञान प्राप्त करने का अन्य कोई साधन। ऐसे में निजी शिक्षा संस्थानों को गांवों में अपने संस्थान खोलने चाहिएं। सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को भी विशेष तौर पर प्रोत्साहित करने की जरूरत है, इसके लिए शिक्षा बजट बढ़ाना चाहिए।
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